उड़न, जिला रायगढ़ से आए श्री सुभाष गुप्ता की कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है, जिसने पहले ही जीवन में कई ऑपरेशन झेले थे, और अब फिर से उसी डर के सामने खड़ा था। लेकिन इस बार उन्होंने एक अलग रास्ता चुना नेचुरल और आयुर्वेदिक उपचार का।
| पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| नाम | श्री सुभाष गुप्ता |
| निवास | उड़न, जिला रायगढ़ |
| पेशा | किराना दुकान व्यवसाय |
| मुख्य समस्या | चक्कर आना, कमजोरी |
| मेडिकल हिस्ट्री | बायपास सर्जरी (2 साल पहले), अपेंडिक्स ऑपरेशन (1990) |
| पहले की सलाह | तुरंत एडमिट और आगे सर्जरी का संकेत |
| उपचार केंद्र | माधवबाग, खोपोली हॉस्पिटल |
| चिकित्सक | डॉ. दीपाली देशमुख |
| पद | ओपीडी हेड |
| अनुभव | 19+ वर्ष |
रुआत में उन्हें हल्के-हल्के चक्कर आने लगे। उन्होंने डॉक्टर को फोन किया, तो डॉक्टर ने कहा कि ईसीजी निकालकर भेजिए। रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर ने तुरंत सलाह दी: “आप तुरंत एमजीएम में डॉक्टर से मिलिए।” अगले दिन जब वे डॉक्टर के पास पहुंचे, तो सिर्फ रिपोर्ट देखकर ही डॉक्टर ने कहा “अभी तुरंत एडमिट हो जाइए, नहीं तो चलते-चलते गिर सकते हैं।” यह सुनते ही वे और उनका परिवार घबरा गया।
सुभाष जी पहले ही:
करवा चुके थे। उन्होंने मन में सोचा “इस शरीर पर और कितना ऑपरेशन करवाना है?” बायपास के बाद भी उन्हें पूरी तरह राहत नहीं मिली थी।
इसलिए उन्होंने इस बार फिर से सर्जरी न कराने का निर्णय लिया।
इसी दौरान उन्हें अपने दोस्त बाबूलाल के जरिए माधवबाग के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने बिना देर किए 5 फरवरी को माधवबाग खोपोली पहुंचने का निर्णय लिया।
यहाँ उनका पूरा चेकअप किया गया:
डॉक्टरों ने उन्हें 7 दिन के लिए एडमिट होने की सलाह दी।
11 तारीख को वे दोबारा आए और भर्ती हुए। यहाँ उन्हें आयुर्वेदिक हार्ट उपचार के साथ पंचकर्म और अन्य उपचार दिए गए। धीरे-धीरे उन्होंने अपने शरीर में बदलाव महसूस करना शुरू किया:
सुभाष जी बताते हैं कि उनका वजन ज्यादा नहीं घटा लगभग आधा किलो ही कम हुआ लेकिन असली बदलाव अंदर से हुआ। “ऐसा लगता है जैसे शरीर को नई ऊर्जा मिल गई हो।”
🔹 पहले:
🔹 अब:
| पैरामीटर | पहले | बाद में |
|---|---|---|
| चक्कर | बार-बार | बहुत कम |
| ऊर्जा | कम | अधिक |
| चलने की क्षमता | सीमित | सामान्य |
| वजन | स्थिर | हल्की कमी |
| मानसिक स्थिति | डर | आत्मविश्वास |
सुभाष जी की किराने की दुकान है।
पहले काम करते समय थकान महसूस होती थी,
लेकिन अब वे बिना थके अपना काम कर पा रहे हैं।
यह बदलाव उनके लिए सबसे बड़ी राहत है।
सुभाष जी बताते हैं:
“ऐसा लगता है जैसे एक मां अपने बच्चे का ख्याल रखती है।”
उनके अनुसार, माधवबाग सिर्फ अस्पताल नहीं,
बल्कि एक परिवार जैसा अनुभव देता है।
सुभाष जी कहते हैं:
“मैं अब अपने आपको पूरी तरह स्वस्थ और स्फूर्तिवान महसूस करता हूं। शरीर में जो बदलाव आया है, वह बहुत बड़ा है।”
यह उपचार
डॉ. दीपाली देशमुख (OPD Head)
माधवबाग, खोपोली
19+ वर्षों के अनुभव के साथ
के मार्गदर्शन में किया गया।
निष्कर्ष: हर बार ऑपरेशन जरूरी नहीं
सुभाष राम लखन गुप्ता की यह कहानी हमें यह सिखाती है “जब शरीर थक जाता है, तो उसे सिर्फ ऑपरेशन नहीं, सही देखभाल और सही दिशा की जरूरत होती है।” आज वे न सिर्फ स्वस्थ हैं, बल्कि एक नई ऊर्जा के साथ अपनी जिंदगी जी रहे हैं।
पूरी कहानी यहाँ देखें : https://youtu.be/-UVsbJnN1Po?si=G3XjGOGLOifjxMYn